अजंता – एक लम्बी कविता

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अजंता अंचल के निवासी प्रयोगशील कृषक कवि श्री. ना. धों. महानोर ने समकालीन मराठी कविता में अपनी ग्रामा?? के सुखदख और शृंगार करुणा की गंधवती अभिव्यक्ति के कारण अपना एक विशिष्ट स्थान प्राप्त किया है। परिसर में जनश्रुति बनी मेजर रॉबर्ट गिल और आदिवासी लड़की पारो की प्रेमकहानी को कवि की कल्पनाशील दृष्टि ने अपने सामने साकार होते हुए देखा और उसे अपनी आत्मीयता की धारा में प्रवाहित कर एक गतिशील लंबी कविता का अनोखा रूप दे दिया। देशी और उपनिवेशी सीमाओं को लांघनेवाली इस प्रेमकहानी की गीतिकाव्यात्म संवेदना की भावगाथा अजंता के गुफाचित्रों में और एक गुफा का जैसे इजाफा करती है।

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Category:
Author

निशिकान्त ठकार

Publisher

पॉप्युलर प्रकाशन

Language

मराठी

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